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सन् 1947--- आशा शैली



बात 1947 के शुरू के दिनों की है। हमारे घर के बाहरी कमरे में एक महात्मा रहते थे, जिन्हें सब अवधूत जी कहते थे और इस बाहरी कमरे को बैठक। अवधूत जी पूरे शरीर पर राख मले रहते और सिर पर जटाओं का बड़ा-सा जूड़ा। सिर्फ लाल रंग का एक लँगोट पहनते थे। उनके न घर में आने का समय था, न जाने का। पता नहीं वे कब घर आते, कब घर से जाते। बस कभी-कभी माँ से खाने को कुछ माँग लेते। यह याद है कि मुहल्ले की औरतें जब उनके पाँव छूतीं तो वे उन्हें बहुत बुरा-भला...

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लाचार द्रौपदी---- आशा शैली



लाचार द्रौपदी न्याय?कहाँ है न्याय?कैसा होता है न्याय? क्या तुमने सुना नहीं?लाठीजिसके हाथ मेंहोती हैभैंसउसी की होती हैयही तो न्याय हैक्योंकि जबशासन का धृतराष्ट्र अन्धा होऔर सत्ता की गांधारीबाँध लेती हैअपनी आँखों परपक्षपात औरभ्रष्टाचार की पट्टी,न्याय की तुलादे देती हैकपट शकुनि के हाथों मेंऔर उसकी संवेदनाजुड़ जाती हैकुव्यवस्था के दुर्धोधनों के साथतब कपट शकुनिचलता है अपनीकुटिल और घिनोंनी चालेंसत्य और धर्म केयुधिष्ठिर हारते हैं...

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क्या कहेंगे आप इसे ----- आशा शैली



एक अच्छे मित्र का कहना था कि बड़े कवियों को छोेटे कस्बे में बुलाना उनका भाव कम करना होता है। पर इन दिनों मुझे दो गाँवों में जाने का अवसर अनायास उपलब्ध हुआ और मैंने पाया कि जो प्यार और अपनापन गाँव वाले श्रोता देते हैं उसके सामने कवि सम्मेलनों से मिलने वाली राशि कोई माने नहीं रखती। पहले तो लखनऊ के निकटवर्ती गाँव इटोंजा जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ जहाँ डॉ. मिथिलेश कुमारी मिश्र अपने पति की समृति में प्रत्येक वर्ष दो लोगों को सम्मानित...

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ग्राम लंगुरा में एक भव्य कविसम्मेलन



आरती प्रकाशन लालकुआँ के संयोजन में बरेली के ग्राम लंगुरा में एक भव्य कविसम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अधयक्छता आशा शैली ने की ,मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार विनय साग़र जायसवाल रहे । प्रथम चरण में आयोजक परिवार की महिलाओं ने आगुंतक कवि/कवयित्रियोंका स्वागत तिलक आरती, उपहार एवंनक़द धन राशि देकर किया।मंजू पान्डेय उदिता(हल्द्वानी)कीवाणी वंदना से प्रारंभ हुए कार्यक्रम का संचालन सत्यपाल सिंह सजग(लालकुआँ) ने सफलता पूर्वक किया।देर...

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श्रीमती कुहेली भट्टाचार्य जी



वेहद अफसोस है साहित्य जगत की विलक्षण प्रतिमा श्रीमती कुहेली भट्टाचार्य जी का दि. 25/11/2014 को देहावसान हो गया । आज दिनांक 04/12/2014 को श्रीमती आशा शैली जी के निवास पर शोक सभा आयोजित की गयी जिसमें उपस्थित श्रीमती आशा शैली जी हल्द्वानी से श्रीमती मन्जू पाण्डे उदिता,डा.श्री वेद प्रकाश प्रजापति अंकुर, काशीपुर से श्री मनोज आर्य...

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शैल सुत्र जुलाई सितम्‍बर 2014 अंक PDF वर्जन



शैल सूत्र जुलाई सितम्‍बर 2014 अंक (PDF वर्जन ) का पढ़ने या डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें  शैल सूत्र लाई सितम्‍बर 2014 अं...

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जब तलक लाली हमारे खून के कतरे मैं है कौन कहता है वतन की आबरू खतरे मैं है मैं भी किसी मिटटी का बना हूँ मेरी पहचान लिख देना मेरे कफन के किसी कोने पे हिदुस्तान लिख देना ----- आनंद गोपाल सिंह बिष्ट...

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